मेरा नाम शमशाद हाशमी है।
मैं एक बेहद गरीब परिवार से ताल्लुक रखता हूँ।
हालात ऐसे थे कि पढ़ाई क्लास 2 से आगे नहीं बढ़ सकी — वजह सिर्फ गरीबी थी।
19 साल की उम्र में बड़े सपनों के साथ मैं दुबई (UAE) आया,
लेकिन किस्मत ने पहले इम्तिहान लिया।
काम छूटा, सहारा टूटा,
और मजबूरी में वॉचमैन की नौकरी करनी पड़ी।
इसी सफ़र में मेरी मुलाक़ात हुई
पप्पू भाई उर्फ़ अरफात भाई से —
जिन्होंने मेरी ज़िंदगी की दिशा बदल दी।
उन्होंने मुझे नौकरी नहीं,
अपने साथ पार्टनर बनाया।
आज अल्हम्दुलिल्लाह,
मैं एक अच्छी पोज़िशन पर हूँ,
UAE के बड़े-बड़े शेखों के साथ उठना-बैठना है।
👉 अगर किसी को UAE में नौकरी चाहिए,
तो बेफिक्र होकर मुझसे संपर्क करें।
मैं वादे नहीं, रास्ते दिखाता हूँ।
स्लोगन:
🔥 “मौत को तो यूँ ही लोग बदनाम करते हैं,
तकलीफ़ तो साली ज़िंदगी देकर जाती है।”